8 वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ

मृत्यु होने की इन आठ वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ
मृत्यु होने की इन आठ वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ

8 वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ

टर्म प्लान खरीदने वाले ज्यादातर लोग यह सोचकर निश्चिंत रहते हैं कि उनकी डेथ के बाद उनके फैमिली मेंबर्स को मुआवजे की रकम मिलनी ही है। क्या आप यह जानते हैं कि टर्म प्लान में मुआवजे का क्लेम करने के लिए जरूरी है कि पॉलिसी खरीदने वाले व्यक्ति की मृत्यु उसमें दी हुई वजह पर ही डिपेंड हो । टर्म प्लान लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर उनके परिजनों को बीमे की रकम मिल जाती है लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि किस तरह मृत्यु होने पर आप बीमे की रकम का क्लेम नहीं कर सकते । ऐसी कौन-कौन से सिचुएशंस है ? और आपके टर्म इंश्योरेंस प्लान का किन सिचुएशंस में आपकी फैमिली मेंबर को कोई भी फायदा नहीं मिलेगा  । वह बिल्कुल वेस्ट है ।
तो दोस्तो आज की इस ब्लॉग में हम आपको ऐसी ही कुछ सिचुएशन के बारे में बताएंगे, जिन सिचुएशन में आपकी फैमिली मेंबर्स को आपके टर्म इंश्योरेंस प्लान का कोई फायदा नहीं मिलेगा । तो चलिए स्टार्ट करते हैं
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मृत्यु होने की इन आठ वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ
मृत्यु होने की इन आठ वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ

टर्म प्लान जीवन बीमा के लिए बहुत ही सही प्रोडक्ट है। यह किसी भी अनहोनी की स्थिति में आपके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देता है।  हालांकि इसमें प्लान की मैच्योरिटी पर पॉलिसी धारक को कोई रकम नहीं मिलती। टर्म प्लान में बीमा खरीदने वाला व्यक्ति पहले से निर्धारित अवधि तक प्रीमियम को पेमेंट करता है और अगर इस दौरान बीमा धारक की मौत हो जाती है तो उसके परिवार यह नॉमिनी को बीमे की रकम मिल जाती है। टर्म प्लान वास्तव में बहुत कम प्रीमियम पर आपको कवर करता है। आमतौर पर टर्म प्लान 10 साल, 15 साल, 20 साल, 25 साल या 30 साल के लिए लिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि कुछ सिचुएशन ऐसी है जिनमें अगर आपकी डेथ होती है तो टर्म प्लान का कोई पैसा आपकी फैमिली मेंबर या नॉमिनी को नहीं मिलेगा। आज हम उन्ही सिचुएशंस की बात करेंगे तो आइए स्टार्ट करते हैं।

मृत्यु होने की इन आठ वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ

  1. दोस्तों अगर पॉलिसी धारक की हत्या होती है या नहीं उसका मर्डर होता है । उस केस में आप क्लेम नहीं कर सकते । आपके टर्म प्लान में बीमा कंपनी आपको उस सिचुएशन में मुआवजे के भुगतान से मना कर सकती है अगर पॉलिसी धारक की हत्या हो जाए और उसमें हत्या में नॉमिनी की भूमिका सामने आए पॉलिसी धारक किसी आपराधिक गतिविधि में भी इंवॉल्व रहा है किसी भी क्रिमिनल एक्टिविटी में इंवॉल्व रहा है तब भी उसकी हत्या पर आपको बीमा की कोई रकम नहीं मिलेगी।
  2. दूसरी सिचुएशन आती है, वह आती है शराब की वजह से अगर मृत्यु हो।
    दोस्तो अगर कोई टर्म पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति शराब के नशे में ड्राइव कर रहा हो या फिर उसने ड्रग्स लिया हो तो इस सिचुएशन में पॉलिसी की जो कंपनी है वह टर्म प्लान के मुआवजे के भुगतान से इंकार कर सकती है। और हां अधिक शराब पीने वाले लोगों को तो बीमा कंपनी पॉलिसी जारी ही नहीं करती।
  3. तीसरी सिचुएशन है वह है, टर्म प्लान खरीदते वक्त अगर आपने यह छुपाया है कि आप स्मोकिंग करते हैं। अगर आप स्मोकिंग करते हैं और टर्म प्लान लेने से पहले आप ने इस बारे में बीमा कंपनी को जानकारी नहीं दी तो आपको बीमा के मुआवजे का दावा आपका जो क्लेम है। वह कैंसिल हो सकता है, खारिज हो सकता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य समस्या ज्यादा होने का खतरा होता है और बीमा कंपनी ऐसे व्यक्ति को बीमा पॉलिसी देने के लिए ज्यादा प्रीमियम चार्ज करती है।
  4. अगली जो सिचुएशन बनती है, वह है। अगर आपको बहुत ही ज्यादा रिस्क लेना पसंद है। कहने का मतलब है कि आप को खतरों से खेलना पसंद है। अगर आप खतरों से खेलना पसंद करते है तो टर्म प्लान जैसी स्कीम आपके लिए नहीं है। किसी एडवेंचर या किसी रिस्की एक्टिविटी में भाग लेने की वजह से हुई मौत पर भी बीमा कंपनी मुआवजे का दावा खारिज कर सकती है। जीवन को खतरा पैदा करने वाली कोई भी एक्टिविटी इस दायरे में आ सकती है। जैसे कार, बाइक रेस या स्काईडाइविंग पैराग्लाइडिंग यह सब भी इसी कैटेगरी में आते हैं।
  5. अगली सिचुएशन है, वह है किसी पुरानी बीमारी की वजह से अगर मृत्यु होती है। दोस्तो अगर आपकी तबीयत पहले से ही खराब है और आपने टर्म प्लान लेते हुए बीमा कंपनी को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दी तो इस वजह से डेथ होने पर बीमा कंपनी आपको टर्म प्लान का मुआवजा देने से इंकार कर सकती है। रेगुलर टर्म प्लान में कई वजह से हुई मौत कवर नहीं होती। इसमें एचआईवी एड्स जैसी बीमारियां शामिल है।
  6. अगली जो सिचुएशन है वह है। अगर आपकी जो डेट है वह प्रेगनेंसी के टाइम होती यानी गर्भावस्था में होती है अगर पॉलिसी धारक की मौत बच्चे को जन्म देते वक्त किसी वजह से हो जाती है, तो इस सिचुएशन में नॉमिनी को उसके टर्म प्लान का मुआवजा नहीं मिल सकता। आम टर्म पॉलिसी में बच्चे पैदा होते वक्त किसी गड़बड़ी की वजह से होने वाली मृत्यु कवर नहीं की जाती। आपको इसके लिए राइडर का सहारा लेना पड़ता है।
  7. अगली सिचुएशन आती है वह है सुसाइड। अगर टर्म पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति प्लान खरीदने के पहले साल में ही सुसाइड कमिट कर लेता है, तो उसके लिए मुआवजे के दावे को खारिज किया जा सकता है। टर्म पॉलिसी खरीदने के बाद दूसरे साल से बहुत सी बीमा कंपनियां हालांकि सुसाइड का भी कवरेज देती है। इसके लिए आप ने जिस टर्म इंश्योरेंस को लिया है उसकी सारी नियम और कंडीशन को आप ध्यान से पढ़ लीजिए।
  8. अगली जो सिचुएशन आती है वह आती है प्राकृतिक आपदा में मौत। अगर टर्म प्लान लेने वाले किसी व्यक्ति की मौत प्राकृतिक आपदा में हो जाती है, तो बीमा कंपनी मुआवजे की पेमेंट से इंकार कर सकती है। इस में चक्रवात भूकंप सुनामी बाढ़ या आग जैसी घटनाएं शामिल है। यह ऐसी सिचुएशन है जिनमें आपकी फैमिली मेंबर्स को टर्म प्लान का कोई मुआवजा नहीं मिलेगा ।

टर्म प्लान लेते टाइम आपको कुछ और बातों का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे कि आपको अपनी सालाना आमदनी का कम से कम 10 गुना बीमा खरीदना चाहिये। इसके साथ ही आप अपनी आमदनी बढ़ने के साथ यह जीवन में बदलाव के साथ बीमा कवर को बढ़ाते रहिए या अलग से टर्म प्लान खरीद ले। इस हिसाब से अगर आप साल में 1500000 कमा सकते हैं तो आपको कम से कम डेढ़ करोड़ रुपए का टर्म प्लान लेना चाहिए। टर्म प्लान का प्रीमियम 3 फैक्टर पर डिपेंड करता है (1) आपकी एज (2) आपके कवरेज का अमाउंट और (3) आपकी पॉलिसी की ड्यूरेशन ।

एक ही उम्र, अवधि और लाइफ कवर के लिए अलग-अलग व्यक्ति से बीमा कंपनी अलग-अलग रकम चार्ज कर सकती हैं। टर्म इंस्योरेन्स पॉलिसी खरीदने से पहले आप ऑनलाइन वेबसाइट पर अलग-अलग फीचर का कंपैरिजन कर सकते हैं। इसके बाद ही आपको टर्म प्लान खरीदना चाहिए। ऑनलाइन वेबसाइट पर कम्पेरिजन करते वक्त आपको किसी कंपनी के टर्म प्लान का क्लेम रेशों देखने की भी जरूरत होती है। 95% के करीब क्लेम रेशों वाली कंपनी को आप टर्म प्लान खरीदने के हिसाब से भरोसेमंद मान सकते हैं । दोस्तों अगर आपकी एज बढ़ती है तो उसके साथ ही बीमा संबंधी जरूरतें भी बढ़ती हैं । जब आप युवा हैं तो बीमा की जरूरत कुछ और होंगी। शादी के बाद इंश्योरेंस कवर बढ़ाना पड़ेगा। इसी तरीके से बच्चे होने पर भी आपके लिए ज्यादा कवर चाहिए होगा। बहुत ही बीमा कंपनियां ऐसे प्लान बेचती हैं जिनमें आप समय के साथ बीमा की जो रकम है, वह बढ़ा या घटा सकते हैं। किसी भी बीमा पॉलिसी में नॉमिनेशन सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट होता है। आप टर्म प्लान अपने परिवार की वित्तीय सुरक्षा के लिए लेते हैं। किसी अप्रत्याशित स्थिति में नॉमिनेशन यह सुनिश्चित करता है कि आप जिसे चाहते हैं। उसे ही बीमा की रकम मिले आपको बीमा खासतौर पर टर्म प्लान खरीदते समय आपको नॉमिनी की जानकारी जरूर देनी चाहिए।

मृत्यु होने की इन आठ वजहों से नहीं मिलता है टर्म प्लान का लाभ

तो दोस्तों इस तरह से टर्म प्लान लेते समय आप इन सभी पॉइंट्स को ध्यान में रखिए और तभी टर्म प्लान लीजिए एंड यह भी ध्यान में रखिए कि किन केसज में टर्म प्लान का कोई बेनिफिट आपकी फैमिली मेंबर्स को नहीं मिलेगा ।

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