The right way to help || मदद करने का सहीं तरीका क्या हैं?

The right way to help
The right way to help

The right way to help || मदद करने का सहीं तरीका क्या हैं?

The right way to help || मदद करने का सहीं तरीका क्या हैं?

हर व्यक्ति का मदद करने का तरीका और उसका मतलब अलग अलग हो सकता है कुछ लोग दिखाकर मदद करते हैं।

उनका मानना यह होता है कि दूसरे लोग भी देखेंगे और उस चीज से इंस्पायर होंगे वो दूसरों की मदद कर पाएंगे चाहे दिखाने के लिए ही करें लेकिन किसी की मदद तो करें लेकिन बहुत सारे लोगों का सोचना यह है कि नेकी कर दरिया में डाल इसका मतलब होता है कि आप मदद करें लेकिन किसी को दिखाएं ना आपने किसी के लिए क्या किया है इसी बात को आज हम एक बहुत ही खूबसूरत स्टोरी से समझते हैं।

The right way to help || मदद करने का सहीं तरीका क्या हैं?

एक बार एक व्यक्ति अपने पूरे परिवार के साथ मेला देखने जा रहा था पूरा परिवार बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड था क्योंकि बहुत समय के बाद पूरा का पूरा परिवार किसे जगह पर जा रहा था बच्चे बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड थे कि आज हम झूला झूल आएंगे आइसक्रीम खाएंगे और बहुत सारी मस्ती करेंगे उसकी पत्नी भी बहुत एक्साइटिड थी कि मैं भी अपने घर के लिए बहुत सारी चीजें लूंगी और वह व्यक्ति भी बहुत ही उत्साहित था कि आज मैं बहुत समय के बाद अपनी फैमिली के साथ मेला जा रहा हूं।

The right way to help || मदद करने का सहीं तरीका क्या हैं?

अब उसी मेले में एक दूसरा व्यक्ति जाने के लिए बहुत ही उत्साहित था जो कि बहुत ही गरीब परिस्थिति का था लेकिन उसके बच्चों को और अपनी पत्नी को मेला ले जाना था क्योंकि उसके बच्चे और पत्नी बहुत दिनों से मेला जाने के लिए कह रहे थे अब वह बहुत ही ज्यादा उत्साहित थे और मेला जाने के लिए तैयार हो रहे थे उन लोगों के पास जो कपड़े थे पहने और वह मेले के लिए निकले और मेले में जब अंदर जाने के लिए लाइन लगी तो जो गरीब व्यक्ति था।

और जो एक दूसरी फैमिली का व्यक्ति था वह दोनों आपस में टिकट लेने के लिए लाइन में लगे अब जैसे ही गरीब व्यक्ति टिकट काउंटर पर पहुंचा काउंटर वाले व्यक्ति ने पूछा की आपको कितने टिकट चाहिए उस व्यक्ति ने कहा कि पांच मेरे बच्चों के लिए एक मेरी पत्नी के लिए और एक मेरे लिए मतलब पूरे सात टिकट चाहिए उस व्यक्ति ने कहा कि ठीक है आप ₹700 मुझे दे दीजिए अब यह सुनते ही उस गरीब व्यक्ति के पांव के नीचे से मानो धरती ही खिसक गई क्योंकि उसके पास सिर्फ ₹200 थे जो कि उसने मेले में जाने के लिए अपने पास बचाए थे अब वह थोड़ी देर के लिए सख पक्का गया।

वह सोचने लगा कि अब मैं क्या करूं उसने पीछे मुड़कर देखा उसके पांचों बच्चे बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड थे।

उसकी पत्नी भी बहुत ज्यादा खुश थी एक पल के लिए उसने अपनी पत्नी को और अपने बच्चों को देखा कि वह कितने खुश हैं लेकिन उसके पास टिकट के लिए पर्याप्त पैसे नहीं है काउंटर वाले व्यक्ति ने फिर से पूछा की अरे भैया पैसे लाइए पीछे बहुत बड़ी भीड़ लगी है।

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आपकी टिकट काट दूं ऊस व्यक्ति ने जेब में हाथ डाला लेकिन सिर्फ 200 रूपये ही में आए वो थोड़ा सा और डर गया और सकपका गया अब मेरे पास तो पैसे नही है अब में क्या करू वो बहोत ज्यादा सोचने लगा और कपकपा ने लगा अब व्यक्ति बहुत ही सोच रहा था बहुत ही घबरा रहा था।

इतने में ही एक व्यक्ति का पीछे से हाथ पड़ा और उस व्यक्ति को कहा कि अरे भाई साहब आप के नीचे पैसे गिर गए हैं आप उन पैसों को उठा लीजिए उस व्यक्ति ने पीछे मुड़कर देखा मेरे पैसे मेरे पास तो ₹200 थे जो मेरे हाथ में है लेकिन उसने नीचे देखा एक 500 का नोट पड़ा हुआ था अब उस वक्त वह व्यक्ति कुछ नहीं समझ सका उसे अपने परिवार की खुशी दिख रही थी।

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उसने जल्दी से वह ₹500 उठाए और टिकट वाले को दे दिए और उस व्यक्ति ने सारी की सारी टिकट उसके हाथ में दे दी जब काउंटर वाले व्यक्ति ने उसे टिकट भी तो कहा कि इस टिकट के साथ आप अंदर जाकर झूला भी झूल सकते हैं।

और कुछ खा पी सकते हैं तो वह व्यक्ति बहुत ही ज्यादा खुश हुआ की टिकट महंगी है लेकिन इसमें मेरा बहुत अच्छा काम हो गया अब वह व्यक्ति वहां से चला गया लेकिन जो पीछे वाला व्यक्ति था वह लाइन से निकलकर वापस अपने परिवार के पास चला गया परिवार वालों ने पूछा कि आप टिकट ले आए उस व्यक्ति ने कहा नहीं मैं टिकट नहीं ला पाया और आज हम मेला नहीं जा रहे हम फिर कभी मेला जाएंगे आज हम बाहर से ही आइसक्रीम खा कर घर चले जाएंगे।

उसके बच्चों ने पूछा के क्यों पापा आज हम मेला देखने क्यों नहीं जा रहे आप तो टिकट लेने के लिए गए थे फिर हम मेला क्यों नहीं जा रहे हैं।

उसकी पत्नी ने अपने बच्चों से कहा कि आज हम मेला इसलिए नहीं जा रहे क्योंकि आपके पापा के वजह से आज कोई और मेला जा रहा है उसकी पत्नी सारी की सारी चीजें देख रही थी और उसने नोटिस किया था कि जब वह व्यक्ति जा रहा था उसके जेब में सिर्फ ₹200 थे।

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उसके बाद वह बहुत ज्यादा घबरा गया उसके पति ने अपने 500 रूपये निकाल कर नीचे फेंक दिए और उस व्यक्ती को दे दिए और उस व्यक्ति को पता भी नहीं चला की ये 500 रूपये किसने दिए है और आज आप के पापा सिर्फ़ 500 रूपये ही ले थे जो की पूरे के पूरे इस व्यक्ति को दे दिए है इसलिए आज हम मेला नहीं जा रहे हैं हम फिर कभी मेला जाएंगे शायद इसी को कहते हैं।

नेकी कर दरिया में डाल इसका मतलब है कि जब आप किसी की मदद करते हैं तो वह दिखावे के भाव से नहीं करते हैं आप अपनी खुशी के लिए किसी की मदद करते हैं ताकि और कोई व्यक्ति आपकी वजह से खुश हो सके

तो आप मुझे कमेंट करके बताएं कि आप किस प्रकार की मदद करना पसंद करते है आप दिखाना चाहते हैं। कि जिससे लोग एस्पायर हो या फिर बिना किसी दिखावे के किसी व्यक्ति की मदद करना चाहते हैं ताकि असल में उसकी मदद हो सके

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तो दोस्तो आप को 99topnews.com की आज की यह ब्लॉग कैसी लगी। बने रहे हमारे साथ ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों ओर inspiration के बारे में जानने के लिए

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